JEE Advanced में पैटर्न बदलने की तैयारी, PCM की जगह सिर्फ एप्टीट्यूड के प्रश्न
सभी 23 आईआईटी में जुलाई में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद प्रथम वर्ष के छात्रों पर होगा ट्रायल
नई दिल्ली। छात्रों के तनाव और कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार आईआईटी में दाखिले के लिए जेईई एडवांस का पैटर्न बदलने की तैयारी कर रही है। अभी जेईई एडवांस में 360 अंक के फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स (पीसीएम) पर आधारित दो पेपर होते हैं।
अब पीसीएम को हटाकर सिर्फ एप्टीट्यूड के प्रश्न शामिल होंगे। इसका ट्रायल सभी 23 आईआईटी में जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से हो रहा है। बीटेक प्रथम वर्ष में जो नए छात्र दाखिले लेंगे, उन्हें ही यह एप्टीट्यूड टेस्ट देना होगा। आईआईटी की नियामक संस्था आईआईटी काउंसिल बैठक में ट्रायल रिपोर्ट पेश की जाएगी। इसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।
जेईई एडवांस में सुधार के लिए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि रिफॉर्म रोडमैप के लिए जुलाई में सभी आईआईटी में अभी बीटेक पहले साल के छात्रों पर एप्टीट्यूड टेस्ट के ट्रायल होंगे। इस परीक्षा में यह देखा जाएगा कि छात्र एप्टीट्यूड प्रश्नों को कितना हल कर पाते हैं। जेईई एडवांस में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स के बजाय सिर्फ एप्टीट्यूड प्रश्नों को शामिल करना होगा। जेईई मेन की तर्ज पर एडवांस की भी साल में दो से अधिक परीक्षा करवाने का प्रस्ताव है। फिलहाल जेईई एडवांस साल में एक ही बार होती है।
दो परीक्षा की जरूरत नहीं: जेईई मेन और फिर जेईई एडवांस में पीसीएम के प्रश्नों की ही परख होती है। जबकि, जेईई मेन के ही शीर्ष ढाई लाख उम्मीदवार एडवांस में जाते हैं। छात्रों को दो बार एक जैसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। इसीलिए एप्टीट्यूड के प्रश्नों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसमें छात्रों की तार्किक क्षमता, गणितीय कौशल, और समस्या-समाधान की क्षमता को परखा जाएगा।
पैटर्न के प्रस्ताव में दो बार बदलाव : कमेटी ने पैटर्न के प्रस्ताव में दो बार बदलाव किया है। पहले पीसीएम संग एप्टीट्यूड के प्रश्नों को शामिल करना था। अब इस परीक्षा में केवल एप्टीट्यूड आधारित प्रश्न होंगे।
सरकार की कोशिश 2018 से, पर आईआईटी नहीं माने
नई शिक्षा नीति 2020 में पढ़ाई और परीक्षाओं का तनाव दूर करने की सिफारिश की गई है। जेईई एडवांस में भारतीय पौधेनिकी ि सफल होने के लिए विद्यार्थी अत्यधिक तनाव और कोचिंग पर निर्भर रहते हैं। वर्ष 2018 में सरकार ने काउंसिल बैठक में प्रश्न पत्र की कठिनाई के स्तर को आसान करने की मांग रखी थी। लेकिन पुराने आईआईटी ने प्रश्न पत्र का कठिनाई लेवल कम करने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि आईआईटी ने तर्क दिया कि इससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होगी।
0 comments:
Post a Comment