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Monday, June 15, 2026

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 1.43 लाख पद खाली, तीस लाख अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती का इंतजार

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 1.43 लाख पद खाली,  तीस लाख अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती का इंतजार

अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती के लिए लगातार बुलंद कर रहे आवाज

प्रयागराज। प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कई करीब 1.43 लाख पद खाली हैं। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 30 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, कई विद्यालय ऐसे हैं जहां शिक्षकों की संख्या कम होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षक भर्ती को लेकर छात्र लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं।


प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 1.32 लाख से अधिक स्कूल हैं। वर्ष 2018 के बाद से इन स्कूलों में कोई नई शिक्षक भर्ती नहीं हुई है। वर्ष 2018 में 68,500 शिक्षकों की भर्ती के मामले में सरकार ने खुद 27 हजार से अधिक पद रिक्त होने की बात स्वीकार की थी।

इसके बाद 69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई। यह मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। 12 जून 2020 को उच्चतम न्यायालय में सरकार की ओर से दिए गए हलफनामे में 51,112 पद खाली होने का उल्लेख था। इस प्रकार वर्ष 2020 तक 78 हजार से अधिक शिक्षक पदों की रिक्तता की पुष्टि हुई थी।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए खाली पदों की संख्या 1.43 लाख बताई है। वहीं, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव - ने कहा, शिक्षकों की कमी से सैकड़ों स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक संसदीय समिति ने भी प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में 1.43 लाख शिक्षकों के पद खाली होने की सिफारिश की है। वहीं, बताया जा रहा कि रिक्त पदों में सीधी भर्ती के लिए 59,882 पद हैं, जबकि शेष पदों को पदोन्नति और अन्य माध्यमों से भरा जाना है।

आठ वर्षों में सीमित भर्तियां और लंबित मामले बेसिक शिक्षा परिषद में 2018-26 के दौरान हुई प्रमुख शिक्षक भर्तियों पर नजर डालें तो वर्ष 2018 में 68,500, वर्ष 2019 में 69,000 शिक्षकों की भर्ती हुई। इसके बाद वर्ष 2021 से 2026 के बीच 69,000 भर्ती के रिक्त पदों पर पूरक चयन व वर्ष 2023 से 2026 के बीच 12,460 पदों की भर्ती का मामला आरक्षण संबंधी विवादों के कारण न्यायालय में विचाराधीन है।

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