जेईई-नीट जैसी परीक्षाएं सेनाओं में प्रवेश का आधार भी बनेंगी, क्लैट पीजी के प्रभावी इस्तेमाल की भी कोशिश
20 जुलाई 2026
नई दिल्ली । सेनाओं में अफसरों की कमी दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय परीक्षाओं जैसे जेईई, क्लैट पीजी, नीट पीजी आदि के प्रभावी इस्तेमाल की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। सेना की कोशिश है कि वह खुद बार-बार परीक्षाएं कराने से बचे तथा इन राष्ट्रीय परीक्षाओं के रैंक के आधार पर उम्मीदवारों को सीधे एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाए।
12 वीं उत्तीर्ण उम्मीदवारों को टीईएस के तहत सेनाओं में भर्ती किया जाता 04 साल की बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनी होती है इन उम्मीदवारों को रक्षा मंत्रालय के अनुसार टेक्निकल एंट्री स्कीम (टीईएस) के तहत तीनों सेनाओं में 12वीं उत्तीर्ण उम्मीदवारों को भर्ती किया जाता है जिसके बाद उन्हें चार साल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनी होती है। चूंकि इंजीनियरिंग मे एडमिशन के लिए जेईई पास करना अनिवार्य है, इसलिए सेनाओं में भी इसे लागू किया गया है।
आयोजन में लगने वाला धन-समय बचेंगे
परीक्षा के आयोजन में लगने वाला वक्त बचेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया तेज होगी।
ज्यादा उम्मीदवार अपनी परीक्षा के रैंक के आधार पर सेना भर्ती के लिए आवेदन करेंगे।
सेना भर्ती परीक्षाओं पर होने वाला खर्च घटेगा। उम्मीदवारों को भी अलग से एक और परीक्षा की फीस नहीं भरनी पड़ेगी।
मेडिकल कोर में होगी भर्ती
मौजूदा समय में जेईई स्कोर के साथ-साथ 12वीं के फिजिक्स, केमिस्ट्री एवं मैथ्स के स्कोर को भी शामिल किया जाता है। आगे सिर्फ जेईई के स्कोर के आधार पर उम्मीदवार को एसएसबी इंटरव्यू के लिए चुना जाएगा। इसी प्रकार मेडिकल कोर में जहां एमबीबीएस डाक्टरों की भर्ती होती है, वहां भी अलग परीक्षा के बजाय नीट पीजी के स्कोर के आधार पर भर्ती करने की योजना है।
2027 से JEE, NEET, CUET का कठिनाई लेवल कम होगा, कोचिंग सेंटर पर घटेगी निर्भरता, ग्रामीण परिवेश के छात्रों को होगा सीधा फायदा
19 जुलाई 2026
नई दिल्ली। इंजीनियरिंग, मेडिकल और विश्वविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से जेईई, नीट यूजी और सीयूईटी यूजी परीक्षाओं का कठिनाई लेवल कम करने की तैयारी चल रही है। सरकार का मुख्य मकसद छात्रों की कोचिंग सेंटरों पर निर्भरता को कम करना है। इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।
नए बदलावों के तहत इन राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं का प्रश्न पत्र सौ फीसदी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम पर आधारित होगा।
सीबीएसई समेत देश के लगभग सभी राज्य शिक्षा बोर्ड 12वीं कक्षा में एनसीईआरटी किताबों से ही पढ़ाई करवाते हैं, इसलिए अब मेधावी छात्रों को कोचिंग की अतिरिक्त जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे ग्रामीण पृष्ठभूमि और सरकारी स्कूलों के छात्रों को रेस में आगे बढ़ने में विशेष मदद मिलेगी।
अभी इन परीक्षाओं का स्तर काफी कठिन होने के कारण छात्रों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है और अभिभावकों पर महंगी फीस का दबाव होता है। इसलिए सरकार इसे सरल करने पर कार्य कर रही है।
2027 से कंप्यूटर आधारित होगा नीट यूजी : सरकारी सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2027 से स्नातक मेडिकल दाखिले के लिए नीट यूजी परीक्षा भी कंप्यूटर आधारित होगी, जबकि जेईई मेन और सीयूईटी यूजी पहले से ही ऑनलाइन मोड में हो रही हैं।
जेईई एडवांस को भी सरल बनाने पर हो रहा काम: उधर, वर्ष 2025 में आए प्रस्ताव के बाद अब आईआईटी कानपुर के निदेशक की अध्यक्षता में एक समिति जेईई एडवांस का कठिनता लेवल कम करने पर भी काम कर रही है। उम्मीद है कि दो से तीन साल में इसका पैटर्न भी आसान हो जाएगा। इसके अलावा, सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए साथी पोर्टल के जरिये मुफ्त नोट्स और रिकॉर्डेड लेक्चर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे घर बैठे मुफ्त में बेहतरीन तैयारी कर सकें।
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