शिक्षा का आधार सुधारेंगे नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में छह दिग्गज, परीक्षा सुधारों के लिए पीएम मोदी ने बनाई उच्च स्तरीय टास्क फोर्स
नई दिल्ली। परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर ध्यान केंद्रित करेगी और भविष्य की सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने का काम इसकी रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। इस टीम में स्पेस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और टेक से जुड़े दिग्गज शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने रविवार रात सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर खुद इसकी जानकारी दी। पीएम ने कहा, हमारी परीक्षा पद्धति विश्वस्त हो, पारदर्शी हो, सबसे ज्यादा तकनीक का उपयोग हो, इसलिए विश्व प्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ नीलेकणि के नेतृत्व में टास्क फोर्स बनाई है। पीएम ने कहा, हम संसद में कठोर कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पर हमें भविष्य की ओर भी सोचना है। पीएम मोदी का पिछले तीन दिन में यह तीसरा वीडियो संदेश है।
कांग्रेस बोली-खराब छवि सुधारने की कोशिश : उच्च स्तरीय टास्क फोर्स बनाने पर कांग्रेस ने कहा कि नई समिति बनाना केवल प्रधानमंत्री की बुरी तरह खराब हो चुकी छवि को सुधारने की कोशिश है। महासचिव जयराम रमेश ने कहा, 2024 में नीट यूजी समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद सरकार ने निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा के लिए डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई थी। इस साल नीट और दूसरी परीक्षाओं में फिर गड़बड़ियां हुईं, जिसके बाद सरकार ने अब एक और समिति बना दी है।
टास्क फोर्स चार बिंदुओं पर तैयार करेगा रोडमैप
टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन : फुलप्रूफ टेस्ट डिलीवरी और प्रोसेस मैनेजमेंट के लिए आधुनिक टेक समाधान का सुझाव देगा।
पेपर लीक पर लगाम : पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी को रोकने के लिए मजबूत प्रणाली बनाने का तरीका सुझाना।
डिजिटल सुरक्षा डाटा एवं साइबर सुरक्षा और अभ्यर्थियों की सत्यापन प्रणाली को अपग्रेड करना।
सिस्टमिक ट्रांसपेरेंसी/प्रणालीगत पारदर्शिता परीक्षाओं में छात्रों व लोगों का भरोसा फिर से कायम करने के लिए प्रक्रिया को पुनर्गठित करना।
बड़ी चुनौती यह: यह टास्क फोर्स मुख्य रूप से नीट यूजी को ऑनलाइन मोड यानी कंप्यूटर आधारित बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि देश में इस साल 22 लाख से अधिक बच्चे नीट-यूजी में शामिल हुए थे। परीक्षा करवाने के लिए इतने कंप्यूटरों का इस्तेमाल, इसके लिए पर्याप्त सेंटर व अन्य संसाधनों की व्यवस्था करना मुश्किल है।
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