गर्भावस्था सरकारी नौकरी पाने में बाधा नहींः हाईकोर्ट, उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का फैसला रद्द
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि गर्भावस्था सरकारी नौकरी पाने में बाधा नहीं मानी जा सकती। स्पष्ट किया कि किसी महिला को नौकरी पाने के अधिकार से वंचित करने का आधार गर्भावस्था नहीं हो सकता। किसी महिला को मातृत्व और रोजगार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करना प्रजनन अधिकार और रोजगार के अधिकार, दोनों का उल्लंघन है। इसके साथ वन रक्षक व वन्यजीव रक्षक भर्ती में गर्भावस्था के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) स्थगित करने का अनुरोध ठुकराने के उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के फैसले को रद्द कर दिया।
यह निर्णय मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने अभ्यर्थी कोमल जायसवाल की विशेष अपील स्वीकार कर दिया है। अपीलार्थी ने वर्ष 2023 की भर्ती में आवेदन किया था। लिखित परीक्षा के बाद फरवरी 2026 में पीईटी से पहले वह नौ माह की गर्भवती थी। लिहाजा 14 किमी पैदल परीक्षा स्थगित करने का अनुरोध किया, लेकिन आयोग ने मांग अस्वीकार कर दी। एकल पीठ ने भी याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने कहा कि विवाहित या गर्भवती होना अयोग्यता नहीं है, नियमों में पीईटी स्थगित करने पर रोक नहीं है तो असाधारण हालात में मानवीय, संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
चार सप्ताह में अपीलार्थीकी पीईटी कराने का निर्देश
कोर्ट ने आयोग को चार सप्ताह के भीतर अपीलार्थी की पीईटी कराने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि यदि वह पीईटी, चिकित्सीय परीक्षण और मेरिट में सफल होती है तो उसे उसी तिथि से नियुक्ति का लाभ दिया जाए, जिस दिन उससे कम मेरिट वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति मिली हो। तब तक ओबीसी महिला वर्ग का एक पद रिक्त रखने का भी आदेश दिया गया है।
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