प्रयागराज । कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने कंप्यूटर आधारित वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं की उत्तरकुंजी को अंतिम रूप देने के लिए चैलेंज व आब्जेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम संबंधी नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत उत्तरकुंजी में अस्पष्ट, त्रुटिपूर्ण या सही विकल्प उपलब्ध न होने पर अभ्यर्थियों को पूरे नंबर दिए जाएंगे। उत्तर कुंजी से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्पष्ट और अभ्यर्थी हितैषी बनाने के लिए यह व्यवस्था वर्ष 2026 की सभी परीक्षाओं और आगामी परीक्षाओं पर लागू होगी।
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं की उत्तरकुंजी को लेकर अभ्यर्थियों की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। कई अभ्यर्थियों ने आरटीआइ, जन शिकायत पोर्टल और न्यायालयों का दरवाजा भी खटखटाया। आयोग ने इन्हीं शिकायतों, अभ्यर्थियों के फीडबैक और न्यायालयों की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा की। इसके बाद नई गाइडलाइन जारी की।
इसके तहत किसी प्रश्न के अस्पष्ट, त्रुटिपूर्ण या कोई सही विकल्प उपलब्ध न होने पर उसे निरस्त कर उस प्रश्न के अंक सभी अभ्यर्थियों को दिए जाएंगे। चाहे उन्होंने प्रश्न का उत्तर दिया हो या नहीं। इसी तरह यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक सही उत्तर पाए जाते हैं, तो उन अभ्यर्थियों को पूरे अंक दिए जाएंगे जिन्होंने किसी भी सही विकल्प का चयन किया है। गलत विकल्प चुनने वालों को नियमानुसार नकारात्मक अंक दिए जाएंगे। कोई प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर का होने पर उसे निरस्त कर सभी को अंक दिए जाएंगे।
इसी प्रकार यदि किसी प्रश्न के हिंदी, अंग्रेजी या अन्य भाषा संस्करण में अनुवाद संबंधी त्रुटि पाई जाती है, तो उस भाषा के अभ्यर्थियों के लिए प्रश्न का मूल्यांकन अलग से किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि पंजाबी भाषा में प्रश्न अस्पष्ट है, लेकिन अंग्रेजी में सही है, तो केवल पंजाबी माध्यम के उम्मीदवारों के लिए उस प्रश्न पर अलग निर्णय लिया जाएगा।
तकनीकी या अतिसूक्ष्म त्रुटियों के आधार पर प्रश्न निरस्त कराने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जाएगा, यदि प्रश्न का आशय सामान्य समझ वाले अभ्यर्थी के लिए स्पष्ट हो। नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि आपत्तियों की विशेषज्ञ जांच करेंगे और उनकी सिफारिश के आधार पर अंतिम उत्तरकुंजी जारी होगी। किसी प्रश्न पर आपत्तियों की संख्या नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता और तथ्यात्मक मजबूती महत्वपूर्ण होगी। यानी यदि केवल एक आपत्ति भी ठोस आधार पर की गई है, तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, जबकि बड़ी संख्या में कमजोर आपत्तियां खारिज की जा सकती हैं।
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