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Thursday, August 6, 2026

जब 25 प्रतिशत प्रश्न ही गलत अथवा पाठ्यक्रम से बाहर के हों तो सिर्फ अंक पुनर्वितरण से न्याय नहीं हो सकता –हाईकोर्ट

जब 25 प्रतिशत प्रश्न ही गलत अथवा पाठ्यक्रम से बाहर के हों तो सिर्फ अंक पुनर्वितरण से न्याय नहीं हो सकता –हाईकोर्ट 

टीजीटी अंग्रेजी: हाई कोर्ट ने उप्र शिक्षा सेवा आयोग से पूछे कई सवाल

आठ प्रश्नों का ब्योरा 17 अगस्त तक देने का आदेश

07 अगस्त 2026
प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती 2026 अंग्रेजी विषय की परीक्षा के प्रश्नपत्रों को तैयार किए जाने में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि जब 25 प्रतिशत प्रश्न ही गलत अथवा पाठ्यक्रम से बाहर के हों तो सिर्फ अंक पुनर्वितरण से न्याय नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने बुधवार को आदित्य कुमार सिंह व 17 अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा है कि आयोग हलफनामे के साथ 17 अगस्त तक आठ विवादित प्रश्न याचीगण को दें ताकि वे यह देख सकें कि यह पाठ्यक्रम से बाहर के हैं अथवा नहीं।

चार अगस्त के आदेश के क्रम में आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक व्यक्तिगत हलफनामे के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। हलफनामे में आयोग ने स्वीकार किया कि प्रश्नपत्र में 29 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर और चार प्रश्न गलत थे। यानी कुल 33 प्रश्न, जो लगभग 25 प्रतिशत बनते हैं। कोर्ट ने एमओयू तथा एसओपी की जांच की। 

यह तथ्य सामने आया कि प्रश्नपत्र बनाने के लिए बाहरी एजेंसी से एमओयू किया जाता है। एजेंसी हर परीक्षा के लिए अलग प्रश्न बैंक और साफ्टवेयर बनाती है। इसके बाद आटोमेटेड रैंडमाइजेशन से प्रश्नपत्र के दो सेट तैयार होते हैं। चेयरमैन इनमें किसी एक सेट की आइडी रैंडम चुन लेते हैं। कोर्ट ने कहा, इस पूरी प्रक्रिया में यह जांचने की कोई व्यवस्था ही नहीं है कि रैंडम चुने गए प्रश्न सही हैं या सिलेबस में हैं। 

एमओयू के क्लाज 21 में सिर्फ आर्थिक दंड का प्रविधान है। यदि एजेंसी गलत प्रश्न देती है तो उसे ब्लैकलिस्ट करने की बात नहीं है। इस पर आयोग के सचिव ने कहा कि एमओयू में ब्लैकलिस्ट का प्रविधान जोड़ने के लिए आयोग तैयार है। प्रश्नपत्र जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी की "दूसरी परत" बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। याचीगण की ओर से कहा गया कि 29 प्रश्न ही गलत माने गए हैं, जबकि आपत्ति 37 प्रश्नों पर थी। शेष आठ प्रश्नों का ब्योरा भी दिया जाए। 

सचिव ने कहा कि अंतिम उत्तरकुंजी के साथ ही ये प्रश्न सार्वजनिक होंगे। कोर्ट ने इसे नहीं माना और कहा कि यदि एक भी प्रश्न और पाठ्यक्रम से बाहर निकला तो परिणाम बदल सकता है। सचिव पहली सितंबर 2026 तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि एमओयू में सख्त प्रविधान और जांच की दूसरी परत कैसे जोड़ी जाएगी? 

कोर्ट ने कहा-गलत प्रश्न हल करने में अभ्यर्थी का अतिरिक्त समय लगता है, जिसकी भरपाई अंक बांटने से नहीं हो सकती। कई बार 0.5 प्रतिशत अंक से भी चयन सूची बदल जाती है। परिणाम घोषित होने से पहले इस मुद्दे का निस्तारण जरूरी है।




प्रश्नपत्रों में गलतियों की कैसे तय करेंगे जिम्मेदारी? - हाईकोर्ट ने शिक्षा सेवा चयन आयोग से पूछा

टीजीटी अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में 25% तक सवाल गलत होने पर की तल्ख टिप्पणी,

तैयार किए गए प्रश्न सही हैं या गलत, आयोग में यह देखने वाला कोई नहीं

6 अगस्त 2026
प्रयागराज। टीजीटी भर्ती परीक्षा के अंग्रेजी के एक प्रश्नपत्र में 33 सवाल गलत या पाठ्यक्रम के बाहर से पूछे जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से पूछा कि भविष्य में इस प्रकार की गलती न हो इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने प्रश्नपत्रों के अलग-अलग सेट तैयार करने से लेकर अंतिम रूप से उनके चयन में आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाया। हैरानी जताई कि आयोग में कोई ऐसा सिस्टम नहीं है, जो प्रश्नपत्रों के चयन में अपने विवेक का इस्तेमाल करे। तैयार किए गए प्रश्न सही हैं या गलत, यह देखने वाला कोई नहीं है।

मंगलवार को मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को तलब किया था। बुधवार को दोनों अधिकारी हाजिर हुए। उनकी ओर से दाखिल हलफनामे में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रकिया की जानकारी कोर्ट को दी गई। जिन एजेंसियों से प्रश्नपत्र तैयार कराए जाते हैं उनमें और आयोग के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) का प्रोफार्मा सील बंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किया गया।




TGT अंग्रेजी के 125 में 33 प्रश्न निकले गलत, हाईकोर्ट ने आयोग के सचिव व परीक्षा नियंत्रक को स्पष्टीकरण सहित किया तलब

कोर्ट ने कहा, जब 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रश्न गलत तो पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी

4 अगस्त 2026
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक टीजीटी अंग्रेजी विषय की परीक्षा में कुल 125 प्रश्नों में 33 प्रश्न गलत पाए जाने पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को बुधवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हलफनामे पर पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रश्न कैसे तैयार किए जाते हैं और परीक्षा कैसे आयोजित की जाती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने आदित्य कुमार सिंह व 17 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


इस मामले की शुरुआत में 29 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर के पाएगए थे। याचियों का कहना था कि परीक्षा में पूछे गए चार प्रश्न गलत हैं। कोर्ट के निर्देश पर विशेषज्ञों ने जांच की तो यही निष्कर्ष निकला। इस तरह कुल 33 प्रश्न गलत निकले, जो पूरे पेपर के 125 प्रश्नों का 25 प्रतिशत से अधिक है। आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आयोग ने इन गलत प्रश्नों के अंक शेष प्रश्नों में बांट दिए हैं और इसके आधार पर एक नई संशोधितचयन सूची तैयार की गई है, जिसमें 42 और अभ्यर्थियों को चयन सूची में जगह मिली है।


 कोर्ट ने आयोग के इस समाधान पर असंतोष जताते हुए कहा कि जब 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रश्न ही गलत निकल रहे हैं तो सिर्फ अंक बांट देना कोई स्थायी हल नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांचकरना जरूरी है, भलेही यह आयोग की अपनी जिम्मेदारी हो कि वह अपनी प्रक्रिया पर आत्मनिरीक्षण करे।

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