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Monday, October 19, 2026

फरवरी तक 30 हजार शिक्षकों की भर्ती करेगा आयोग, टीईटी के संशोधित प्रमाणपत्र जल्द होंगे उपलब्ध, पुराने से न भरें भर्ती का फार्म

फरवरी तक 30 हजार शिक्षकों की भर्ती करेगा आयोग, शिक्षा सेवा चयन आयोग अध्यक्ष बोले,

उत्कृष्ट अभ्यर्थी होंगे नियुक्त, भर्ती में फर्जी डिग्रियों पर लगेगी लगाम, प्रमाणपत्रों का सत्यापन डिजिलाकर से

आनलाइन हो रहीं भर्तियां, किसी तरह का दबाव नहीं किया जाएगा स्वीकार

लखनऊः चार साल से लंबित शिक्षक भर्तियों, परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतों और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठते सवालों के बीच उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अब भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने में जुटा है।

आयोग जनवरी से फरवरी तक करीब 25 से 30 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने जा रहा है। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को पकड़ने के लिए अब डिजिलाकर से भी डिग्रियों का सत्यापन शुरू करेगा। दैनिक जागरण के राज्य स्तरीय विमर्श में सोमवार को वर्चुअल माध्यम से जुड़े आयोग के अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि चयन केवल मेरिट के आधार पर हो रहा है, किसी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने लंबित भर्तियों, आगामी परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किए जा रहे तकनीकी बदलावों की जानकारी भी साझा की। यह भी अपील की कि अभ्यर्थी अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपनी तैयारी और प्रतिभा पर भरोसा करें।

पिछले वर्ष 19 दिसंबर को कार्यभार संभालने वाले अध्यक्ष ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती लंबित भर्ती परीक्षाओं को पूरा कराने और अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने की थी। वर्ष 2022 से असिस्टेंट प्रोफेसर, पीजीटी और टीजीटी सहित कई भर्तियां लंबित थीं। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) भी लंबे समय से नहीं हुई थी और एक परीक्षा में पेपर लीक का विवाद भी सामने आया था। इसके दृष्टिगत बीते 10 महीने के भीतर लंबित परीक्षाएं कराई गईं। डिग्री कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया है। वहीं, अन्य तीन भर्तियों के परिणाम घोषित करने के साथ नियुक्ति पत्र भी वितरित किए जा चुके हैं। 

चार वर्ष बाद आयोजित टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में 19 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें 13 लाख उत्तीर्ण हुए। अब आगे फरवरी तक होने वाली 25 से 30 हजार शिक्षक भर्तियों में डिग्री कालेज प्राचार्य के 111, असिस्टेंट प्रोफेसर के 2000, प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 12,000, पीजीटी के करीब 2500 तथा प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों के लगभग 2500 पद शामिल हैं। इसके अलावा टीजीटी के करीब 14 से 15 हजार पदों का अधियाचन आने वाला है। 

अध्यक्ष ने बताया कि जिन पदों के लिए अधियाचन प्राप्त हो चुके हैं, उनकी परीक्षाओं की तिथियां घोषित की जा चुकी हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों का अधियाचन अभी लंबित है। इन पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा तिथि जल्द तय होगी। उच्च शिक्षा में प्राचार्य पदों की परीक्षा 24 सितंबर को कराई जा चुकी है। नवंबर में अंतिम परिणाम आने की उम्मीद है। पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए पहली बार विशेष टीईटी तीन नवंबर को आयोजित होगी। डिग्री कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 19 और 20 नवंबर को प्रस्तावित है। नगरीय क्षेत्र के प्राथमिक शिक्षकों व माध्यमिक स्कूलों में संबद्ध प्राथमिक शिक्षकों के चयन के लिए परीक्षा तीन व चार दिसंबर को होगी। वहीं, पीजीटी (प्रवक्ता) भर्ती परीक्षा 15 और 16 दिसंबर को संभावित है।



टीईटी के संशोधित प्रमाणपत्र जल्द होंगे उपलब्ध, पुराने से न भरें भर्ती का फार्म,  शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार ने दी जानकारी

टीजीटी के 17,740 पदों पर भर्ती का विज्ञापन शासन स्तर पर लंबित बिंदुओं के निस्तारण के बाद होगा जारी

लखनऊ : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने वाले जिन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में नाम, पता या अन्य विवरण गलत दर्ज हैं, उन्हें जल्द ही संशोधित प्रमाणपत्र उपलब्ध होंगे। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार ने जागरण विमर्श में पूछे गए सवाल पर यह जानकारी दी। कहा कि प्रमाणपत्र में त्रुटि होने पर पुराने प्रमाणपत्र के आधार पर भर्ती का आवेदन फार्म न भरें। टीईटी उत्तीर्ण करीब 20 हजार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में विभिन्न कारणों से नाम, पता आदि की त्रुटियां रह गई थीं। इन अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र संशोधित कराने का मौका मिला था। अब वे संशोधित प्रमाणपत्रों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए ही सहायक अध्यापक (प्राथमिक विद्यालय) भर्ती के विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर की गई है।

प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी)-2026 के तहत 17,740 पदों पर भर्ती का अधियाचन मिलने के बावजूद अब तक विज्ञापन जारी नहीं होने के सवाल पर उन्होंने बताया कि कुछ बिंदु शासन स्तर पर निस्तारित होने के बाद भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अटल आवासीय विद्यालयों और अल्पसंख्यक कालेजों से संबंधित अधियाचन अभी आयोग को नहीं मिले हैं। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आए आफलाइन अधियाचन में अभी पदों का पूरा विवरण नहीं मिला है। 

विधानसभा चुनाव की संभावना और आचार संहिता लागू होने के भर्ती प्रक्रिया पर पड़ने वाले असर पर कहा कि आयोग अपना काम जारी रखेगा। निर्वाचन आयोग की और से कोई आपत्ति या निर्देश मिलता है तो उसका पालन होगा। शिक्षक भर्तियों का नियमित कैलेंडर लागू करने और समय पर विज्ञापन, परीक्षा व परिणाम जारी करने के सवाल पर बताया कि रिक्त पदों की संख्या और शैक्षणिक योग्यता तय करना संबंधित विभागों काम है। विभागों से अधियाचन मिलने के बाद आयोग उसका परीक्षण कर विज्ञापन जारी करता है। प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए तकनीकी के साथ विशेषज्ञों की टीम लगाई जाती है। प्रश्नपत्र की गोपनीयता ऐसी है कि आयोग के अध्यक्ष भी चाहें तो उसे पहले से नहीं जान सकते।

परीक्षाओं के परिणाम अदालत में विवाद के कारण अटकने के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नपत्र में कोई सवाल गलत होने पर संशोधित उत्तर कुंजी जारी कर अभ्यर्थियों के हित में निर्णय लिया जा रहा है। पुरानी परीक्षाओं से जुड़े कोई बड़े मामले लंबित नहीं हैं। वर्ष 2013 में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति को अदालत में चुनौती दिए जाने से प्रक्रिया रुकने के मामले पर बताया कि कुछ संस्थानों के प्रमुख कार्यवाहक थे। अदालत ने आयोग के पक्ष में ही निर्णय सुनाया।

 शिक्षक भर्ती में पैनल की एक वर्ष की वैधता के सवाल पर कहा कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना होगा। परीक्षा और परिणाम समय पर जारी करने के संबंध में अध्यक्ष ने बताया कि जिन परीक्षाओं में साक्षात्कार नहीं होता, उनमें लिखित परीक्षा का परिणाम एक माह में घोषित करने का प्रयास रहता है। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में हुई नियुक्तियों और अदालत के निर्देश पर जांच के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि यह पुरानी भर्ती से जुड़ा मामला है। नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का पूरा परीक्षण और पुलिस सत्यापन कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।

जरूरत के अनुसार बदलता है पाठ्यक्रम
बेहतर शिक्षकों के चयन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बनाए रखने के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि पद की प्रकृति के अनुसार पाठ्‌यक्रम तैयार होता है। प्रधानाचार्य का पद प्रशासनिक प्रमुख का है, इसमें प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अनुरूप पाठ्यक्रम रखा जाता है। असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में सामान्य ज्ञान को भी शामिल किया जाता है, जबकि प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल स्तर के शिक्षकों के चयन में विषय आधारित पाठ्यक्रम होता है। जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव भी होंगे। शिक्षक भर्ती में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को भी शामिल होने का अधिकार है। इस संबंध में निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा। टीजीटी भर्ती में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष करने के सवाल पर कहा कि अभी अधियाचन नहीं मिला है, आयु सीमा तय करना विभाग का विषय है। 

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