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Wednesday, October 7, 2026

असिस्टेंट प्रोफेसर के 28 विषयों का इंटरव्यू पुरानी परीक्षा से होगा, सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

असिस्टेंट प्रोफेसर के 28 विषयों का इंटरव्यू पुरानी परीक्षा से होगा, सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार 

केवल पांच विषयों का साक्षात्कार पुनर्परीक्षा के आधार पर हो सकेगा 

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अप्रैल में दोबारा कराई थी परीक्षा

7 अक्टूबर 2026
प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के 17 अप्रैल 2026 के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए शीर्ष कोर्ट ने आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिकाओं को मंगलवार को खारिज कर दिया है। इसी के साथ साफ हो गया है कि 33 विषयों में से 28 विषयों का साक्षात्कार 16-17 अप्रैल 2025 को पहली बार आयोजित परीक्षा के आधार पर होगा, जबकि पांच विषयों का इंटरव्यू 18-19 अप्रैल 2026 को आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर होगा।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि प्रश्नपत्र लीक से संबंधित उपलब्ध सामग्री उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और प्राणी विज्ञान पांच विषयों से संबंधित थी। इन विषयों में प्रभावित और अप्रभावित अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं होने के कारण इनको  पुनर्परीक्षा कराई जाए। वहीं, 28 अन्य विषयों के संबंध में प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी कोई सामग्री सामने नहीं आई। इनके लिए 16-17 अप्रैल 2025 को हुई मूल लिखित परीक्षा को ही आधार बनाए जाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 18 और 19 अप्रैल 2026 को सभी 33 विषयों की पुनर्परीक्षा कराई थी।

आयोग ने 29 जून को सभी 33 विषयों का परिणाम घोषित करते हुए सफल 3155 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 जुलाई से प्रस्तावित किए थे। हालांकि बाद में कुछ अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी जिसके कारण साक्षात्कार नहीं हो सके थे। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस विज्ञापन में कानूनी विवाद का पटाक्षेप हो गया है। 

हालांकि 28 विषयों की पुनर्परीक्षा में चयन की उम्मीद लगाए सैकड़ों अभ्यर्थियों को निराशा हुई है। गौरतलब है कि 16-17 अप्रैल 2025 को आयोजित परीक्षा में धांधली के कारण सरकार ने पूरी परीक्षा निरस्त कर दी थी। आयोग के पीआरओ डॉ. संजय कुमार सिंह का कहना है कि गुरुवार को होने वाली बैठक में इस पर चर्चा होगी




असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के विवाद में आमने सामने आए बेरोजगार, हाईकोर्ट ने पांच विषयों की परीक्षा रद्द करने का दिया था आदेश

पुरानी परीक्षा को रद्द करने का मसला शीर्ष कोर्ट में विचाराधीन

सरकार के निर्णय पर नए सिरे से हुई सभी विषयों की परीक्षा

25 सितंबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती के लिए दो बार आयोजित लिखित परीक्षा में सफल बेरोजगार आमने-सामने आ गए हैं। हाईकोर्ट से होते हुए यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। शीर्ष कोर्ट से फैसला आने के बाद ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू होगी।


वर्ष 2022 में आवेदन लेने के तीन साल बाद 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित परीक्षा में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे और आखिरकार परीक्षा के साढ़े आठ महीने बाद सात जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखित परीक्षा निरस्त कर दी। 

उसके बाद चयन आयोग ने नए सिरे से परीक्षा की तैयारी शुरू की तो पहली बार आयोजित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर दी। 18 और 19 अप्रैल 2026 को दोबारा परीक्षा से पहले हाईकोर्ट ने कुल 33 में से केवल उन पांच विषयों (उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान) की ही पुनर्परीक्षा कराने को कहा था, जिनमें धांधली की बात सामने आई थी। हालांकि चयन आयोग ने सभी 33 विषयों की दोबारा परीक्षा करा दी। इसमें सफल 3155 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित थे।

 इस बीच पहली परीक्षा में सफल और पुर्नपरीक्षा से असंतुष्ट अभ्यर्थियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने साक्षात्कार पर रोक लगा दी थी। इस मामले में पुर्नपरीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने भी साक्षात्कार करवाने के लिए याचिका की है। अब इस मामले की सुनवाई अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में होनी है।

पांच विषय के अभ्यर्थियों ने भी लगाई गुहार

पहली बार आयोजित परीक्षा में जिन पांच विषयों में गड़बड़ी की बात सामने आई है उनमें सफल अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। उनका कहना है कि विस्तृत जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए लेकिन सभी अभ्यर्थियों को बाहर करना उचित नहीं है।

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