लंबित प्रधानाचार्य भर्ती 2013 में चयन को हाईकोर्ट ने दी हरी झंडी, 115 याचिकाएं खारिज
कहा- चयन प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा कर अंतिम परिणाम तक पहुंचाया जाए
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से वर्ष 2013 में शुरू की गई प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली 115 याचिकाओं को खारिज कहा कि चयन प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा कर अंतिम परिणाम तक पहुंचाया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने मिर्जापुर के डॉ. संजय कुमार मिश्रा की याचिका सहित अन्य 115 याचिका पर दिया है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से वर्ष 2013 में प्रधानाचार्य पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। क्षेत्रवार चयन सूची नवंबर 2022 में जारी की गई थी। इसके खिलाफ मुख्य रूप से ऐसे कार्यवाहक प्रधानाचार्यों ने याचिकाएं दाखिल की थीं, जो साक्षात्कार में शामिल होने के बावजूद चयनित नहीं हुए थे।
कोर्ट ने याचिकाओं को तीन श्रेणियों में बांटा था। पहली श्रेणी में वे अभ्यर्थी थे जो आवेदन की अंतिम तिथि 25 फरवरी 2014 को पात्र नहीं थे। दूसरी श्रेणी में वे थे जो याचिका लंबित रहने के दौरान सेवानिवृत्ति आयु पूरी कर चुके थे, जबकि तीसरी श्रेणी में वे अभ्यर्थी थे जिन्होंने साक्षात्कार दिया लेकिन कम अंक होने के कारण चयनित नहीं हुए। याचियों की ओर से कहा गया कि चयन प्रक्रिया में पहले से निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने के बाद असफल अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता। कोर्ट ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की पात्रता आवेदन की अंतिम तिथि पर ही नहीं थी, उन्हें चयन सूची को चुनौती देने का कोई कारण नहीं था।
सेवानिवृत्ति आयु प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति नहीं दी जा सकती। साक्षात्कार में कम अंक पाने वाले याचियों की भी तर्क को कोर्ट ने खारिज करते हुए सभी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
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