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Wednesday, October 7, 2026

शासन ने स्पष्ट किया, आचार्य (संस्कृत) की उपाधि स्नातकोत्तर के समकक्ष, शासन की इस स्पष्टता के बाद भर्ती की शैक्षिक अर्हता को लेकर बना असमंजस दूर

शासन ने स्पष्ट किया, आचार्य (संस्कृत) की उपाधि स्नातकोत्तर के समकक्ष, शासन की इस स्पष्टता के बाद भर्ती की शैक्षिक अर्हता को लेकर बना असमंजस दूर

शासन ने स्पष्ट किया, आचार्य (संस्कृत) की उपाधि स्नातकोत्तर के समकक्ष

आचार्य डिग्रीधारियों के लिए प्रवक्ता (संस्कृत) पद का रास्ता साफ, 

मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद दूर हुआ शैक्षिक अर्हता को लेकर भ्रम

8 अक्टूबर 2026
 वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य (संस्कृत) उपाधि प्राप्त अभ्यर्थियों के लिए प्रवक्ता (संस्कृत) पद पर आवेदन का रास्ता साफ हो गया है। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5 ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय की आचार्य (संस्कृत) उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि है। ऐसे अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन संख्या 06/2026 के तहत प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। शासन की इस स्पष्टता के बाद भर्ती की शैक्षिक अर्हता को लेकर बना असमंजस दूर हो गया है।

जारी प्रवक्ता भर्ती के विज्ञापन के बाद बनी थी। आचार्य उपाधिधारी अभ्यर्थियों के सामने शैक्षिक अर्हता को लेकर सवाल खड़ा हो गया था। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विद्यार्थियों के हित से जुड़े इस विषय को शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष और माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को भी पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद शासन ने आयोग को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की। 

पत्र में कहा गया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जारी आचार्य (संस्कृत) विषय की उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि है। इसके आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन करने में कोई कठिनाई नहीं है।

कुलपति ने बताया कि विज्ञापन में बनी स्थिति किसी नीतिगत निर्णय का परिणाम नहीं थी, बल्कि भाषा अथवा शब्दावली से जुड़ी कार्यालयीय भ्रांति के कारण असमंजस पैदा हुआ था। मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में आने के बाद इसका त्वरित समाधान किया गया। उन्होंने आचार्य (संस्कृत) उपाधिधारी अभ्यर्थियों से अपील की कि शासन की स्पष्टता के बाद वे किसी भ्रम में न रहें। विज्ञापन में निर्धारित अन्य अर्हताएं पूरी करने वाले अभ्यर्थी निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन करें।




प्रवक्ता भर्ती में संपूर्णानंद विवि के छात्रों को मौका नहीं, शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा

01 अक्टूबर 2026
प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की डिग्री पाने वालों को अवसर नहीं मिलने से अभ्यर्थियों में आक्रोश है। 

इस संबंध में संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति का पत्र मिलने के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। यदि शासन स्तर से योग्यता संबंधी शब्दावली में संशोधन को मंजूरी मिलती है तो पोर्टल पर भी आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। 

चयन आयोग के विज्ञापन में जो अर्हता अंकित है उसके अनुसार, अभ्यर्थी को किसी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि और बीएड होना चाहिए। इसमें समकक्ष योग्यता का उल्लेख नहीं है। इसकी वजह से संपूर्णानंद संस्कृत विवि के अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।



शिक्षक भर्ती के संस्कृत विषय के विज्ञापन में अर्हता स्पष्ट नहीं

शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ने लिखा पत्र

कहा, "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" की अर्हता का स्पष्ट उल्लेख किया जाए

30 सितंबर 2026
प्रयागराजः उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से प्रकाशित विज्ञापन संख्या 06/2026, दिनांक 15.09.2026 में संस्कृत विषय की अर्हता में मात्र "स्नातकोत्तर संस्कृत" का उल्लेख है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की डिग्री लेने वाले असमंजस में हैं। वजह यह कि "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।


संस्कृत विषय की पारंपरिक एवं विशिष्ट उच्च शिक्षा व्यवस्था से आचार्य उपाधि प्राप्त अन्य अभ्यर्थियों के मध्य भी अर्हता को लेकर भ्रम है। पूर्व में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद / बोर्ड तथा उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से समय-समय पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों में संस्कृत विषय के अध्यापन पदों के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता में "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाता रहा है।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। कहा है, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्राप्त 'आचार्य' उपाधि संस्कृत विषय में उच्च स्तरीय विशिष्ट शैक्षिक योग्यता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारतीय विश्वविद्यालय संघ और उप्र शासन की ओर से तय समकक्षता संबंधी प्रावधानों के अनुरूप एमए (संस्कृत) के समकक्ष मान्य है। 

आयोग की ओर से प्रकाशित विज्ञापन में संस्कृत विषय की योग्यता में सिर्फ "स्नातकोत्तर संस्कृत" का उल्लेख है। आग्रह है कि संस्कृत विषय से संबंधित सभी विज्ञापनों में शैक्षिक योग्यता में स्पष्ट रूप से "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" लिखा जाए। वर्तमान विज्ञापन में भी इस योग्यता को शामिल करते हुए शुद्धिपत्र जारी किया जाए।

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