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Monday, June 10, 2024

18 हजार से अधिक कॉपियों की जांच में सामने आएगा अदला-बदली का सच, आयोग पता लगाने में जुटा, कैसे बदल गई PCS–J मुख्य परीक्षा की कॉपी

18 हजार से अधिक कॉपियों की जांच में सामने आएगा अदला-बदली का सच

आयोग पता लगाने में जुटा, कैसे बदल गई PCS–J मुख्य परीक्षा की कॉपी

आरओ/एआरओ पेपर लीक प्रकरण के बाद यूपीपीएससी के सामने नई चुनौती


प्रयागराज। पीसीएस जे मुख्य परीक्षा के आयोजन को एक साल बीत चुके हैं, लेकिन यह अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है। एक अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग मैच नहीं करने व कुछ पेज फाड़ने के आरोप का मामला कोर्ट में जाने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने मुख्य परीक्षा की सभी कॉपियों की जांच शुरू करा दी है। जांच पूरी होने के बाद कॉपी की अदला-बदला का सच सामने आ सकेगा।

अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का अवलोकन करने के बाद अभ्यर्थी श्रवण पांडेय ने आपत्ति की है कि अंग्रेजी की उत्तर-पुस्तिका की हैंडराइटिंग उसकी हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने मुख्य परीक्षा की सभी कॉपियों का वेरिफिकेशन शुरू करा दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्तर पुस्तिका वास्तविक है या कोई विसंगति तो नहीं हुई है।

यानी आयोग कॉपी बदले जाने के आरोपों को अभी खारिज नहीं कर रहा है। आयोग की ओर से न्यायालय में दिए गए हलफनामे में बताया गया है कि मुख्य परीक्षा में 3019 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनके छह विषयों की कुल 18042 उत्तर पुस्तिकाएं हैं। आयोग की ओर से अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं पर अनुक्रमांक के स्थान पर फेक मास्टरकोड अंकित होता है।

आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फेक मास्टरकोड को डिकोड करने के बाद ही वास्तविक उत्तर पुस्तिका का पता चल सकेगा। इसके बाद ही 18042 उत्तर पुस्तिकाओं में से अभ्यर्थी की अंग्रेजी विषय की कॉपी निकाली जा सकेगी। इसके साथ ही आयोग को न्यायालय में सभी छह विषयों की उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत करनी हैं। आयोग ने जांच शुरू करा दी है और उत्तर पुस्तिकाओं पर दर्ज फेक मास्टरकोड को डिकोड किया जा रहा है।


तकनीकी गड़बड़ी या षडयंत्र ?

जांच के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि अभ्यर्थी का दावा सही है या गलत। अगर दावा सही है कि ऐसा किसी षडयंत्र के तहत किया गया या तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ। मामले का सच सामने आने के बाद आयोग अपने स्तर से बड़ी कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल, बीते दिनों आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक प्रकरण के बाद विवादों में घिरे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अब एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।



PCS–J  मुख्य परीक्षा की कॉपियों की जांच शुरू, UPPSC को एक जुलाई को हाईकोर्ट में देनी है रिपोर्ट

आयोग ने कोर्ट से मांगा समय, बोलने से कतरा रहे अफसर अपने हलफनामे में आयोग ने कहा है कि इस परीक्षा में कुल 3019 अभ्यर्थियों के छह विषयों की 18042 कॉपियों पर अनुक्रमांक के स्थापन पर फेक मास्टर कोड अंकित किए गए हैं। उन्हें डिकोड करने के बाद ही वास्तविक उत्तर पुस्तिका का पता लगाया जा सकेगा। इसके बाद ही इस अभ्यर्थी की अंग्रेजी विषय की कॉपी निकाली जा सकेगी। इसके लिए आयोग ने कोर्ट से कुछ और समय देने का आग्रह किया है। इस संबंध में आयोग के अफसरों से जब जानकारी पूछा गया कि सभी कॉपियों की जांच कराई जा रही है या पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा, तब उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।


आयोग ही कॉपियों को सुरक्षित नहीं रख सका, कॉपी में हैंडराइटिंग बदलने और पन्ने फटने के आरोप से व्यवस्था पर उठे सवाल, बड़ी मुश्किल से धुला दाग, फिर उठे सवाल

यूपी बोर्ड से बदतर लोक सेवा आयोग के हालात

प्रयागराज । उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज जूनियर डिवीजन (पीसीएस-जे) भर्ती 2022 की मुख्य परीक्षा में कॉपी बदलने और पन्ने फाड़ने के आरोप ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। इससे पहले इस प्रकार की घटनाएं यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के दौरान उत्तरपुस्तिका बदलने या कवर पेज फाड़कर दूसरे परीक्षार्थी का पेज लगाने के आरोप लगते थे।

ऐसे मामले हाईकोर्ट पहुंचने पर यूपी बोर्ड ने कई स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की और कई स्कूलों को परीक्षा से डिबार तक कर दिया। पिछले कुछ सालों में कॉपी की सिलाई करने और पन्नों की लाइनों का रंग बदलने से इन घटनाओं को रोकने में यूपी बोर्ड तो सफल हो गया लेकिन सबसे गोपनीय तरीके और फुलप्रूफ सुरक्षा में परीक्षा कराने वाला लोक सेवा आयोग ही कॉपियों को सुरक्षित नहीं रख सका।


बड़ी मुश्किल से धुला दाग, फिर उठे सवाल

प्रयागराज। 2012 से 2016 तक की भर्तियों में भ्रष्टाचार के आरोपों से निकलने में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को काफी मेहनत करनी पड़ी। 2017 से अब तक आयोगों की भर्तियां न सिर्फ पटरी पर आई बल्कि कोई बड़ा सवाल खड़ा नहीं हुआ। हालांकि पीसीएस जे 2022 की मुख्य परीक्षा में शामिल सभी 3019 अभ्यार्थियों की 10842 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराने के आयोग के फैसले ने फिर से सवाल खड़े होने लगे है। निश्चित रूप से अपनी पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए आयोग ने बड़ा फैसला लिया है लेकिन प्रतियोगी छात्रों के जेहन में पुराने कारनामे ताजे होने लगे हैं।



पेपर लीक के बाद अब कॉपीकांड बना आयोग के गले की फांस, हैंडराइटिंग बदलने के आरोपों से बेदाग निकलना आयोग के लिए चुनौती


प्रयागराज । समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) 2023 की प्रारंभिक परीक्षा के पेपर लीक के बाद अब उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज जूनियर डिवीजन (पीसीएस-जे) भर्ती 2022 की मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थी की हैंडराइटिंग बदलने का आरोप उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के गले की फांस बन गया है। इन दोनों प्रकरणों की वजह से प्रदेश में 2017 में सरकार बदलने के बाद से नियमित भर्तियां कर रहे आयोग की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया है। 

पीसीएस-जे 2022 की मुख्य परीक्षा में शामिल सभी 3019 अभ्यार्थियों की 10842 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि कितने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। आयोग ने पीसीएस-जे 2022 का अंतिम परिणाम 30 अगस्त 2023 को घोषित किया था। न्यायिक अधिकारियों के 303 पदों के सापेक्ष 302 अभ्यर्थियों को सफलता मिली थी। यह परिणाम महिला अभ्यर्थियों के लिए खास था क्योंकि चयनितों में 165 महिलाओं (लगभग 55 प्रतिशत) ने सफलता हासिल की थी। कुल चयनित अभ्यर्थियों में प्रदेश के 60 जिलों का प्रतिनिधित्व रहा। 

आयोग ने 28 अगस्त 2023 को साक्षात्कार खत्म होने के 48 घंटे के अंदर परिणाम देकर रिकॉर्ड भी बनाया था। हालांकि उत्तरपुस्तिकाओं की शुचिता पर सवाल उठने के बाद से आयोग बैकफुट पर है।


नौ माह में आवेदन से चयन तक पूरी हुई थी प्रक्रिया

आयोग ने पीसीएस-जे के आवेदन से लेकर अंतिम परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया नौ महीने के अंदर पूरी करने का कीर्तिमान बनाया था। तेजी से भर्ती पूरी होने के कारण आयोग को वाहवाही भी मिली थी। इस भर्ती के लिए दस दिसंबर 2022 से ऑनलाइन आवेदन शुरू हुए थे और 30 अगस्त 2023 को अंतिम चयन परिणाम घोषित हुआ था। 

भर्ती के लिए आवेदन करने वाले 79565 अभ्यर्थियों में से 50837 अभ्यर्थी 12 फरवरी 2023 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए थे। प्रारंभिक परीक्षा के आधार पर कुल 3145 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। 23 से 25 मई तक आयोजित मुख्य परीक्षा में कुल 3019 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एक अगस्त को घोषित मुख्य परीक्षा के परिणाम में 959 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया गया था। 16 से 28 अगस्त तक आयोजित साक्षात्कार में सभी 959 अभ्यर्थी शामिल हुए थे 


इस भर्ती में बदले थे नियम

पीसीएस-जे 2022 में शासन ने महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। अप्रैल 2022 में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (चतुर्थ संशोधन) नियमावली 2022 को मंजूरी दी गई थी। अंग्रेजी भाषा के 200 अंकों के प्रश्नपत्र की बजाय अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं के 100-100 अंकों के प्रश्नपत्र पूछे गए थे। न्यायिक अधिकारियों की भर्ती में दिव्यांगों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का भी प्रावधान किया गया था। उससे पहले आयोग ने 2018 में 610 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी जो 20 जुलाई 2019 को पूरी हुई थी।



PCS–J मेंस की सभी उत्तर पुस्तिकाओं की फिर आयोग करेगा जांच, अभ्यर्थी ने उत्तर पुस्तिका में कुछ पेज फाड़ने व हैंडराइटिंग बदलने का लगाये आरोप पर हाईकोर्ट ने तलब की थी कॉपियां 

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प्रयागराज। उप्र.लोक सेवा आयोग फिर से पीसीएस-जे मेंस 2022 की सभी 18042 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करेगा। आयोग ने हाईकोर्ट में शुक्रवार को हलफनामा दाखिल कर इसकी जानकारी दी। अभ्यर्थी श्रवण पांडेय ने उत्तर पुस्तिका में कुछ पेज फाड़ने व अंग्रेजी की हैंडराइटिंग बदलने का आरोप लगा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।


न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही है। आयोग ने माना है कि पूरी सतर्कता के बाद भी गलती हो सकती है। यदि ऐसा हुआ है तो उसे सुधारा जाएगा। याची अधिवक्ता विभु राय ने कोर्ट में पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने आयोग को याची के छह प्रश्नपत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए कहा था। आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मुख्य परीक्षा में शामिल सभी 3019 अभ्यार्थियों की 18042 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराई जा रही है।


उत्तर पुस्तिकाओं पर रोल नंबर की जगह फेक मास्टर कोड अंकित किया जाता है। इसे डिकोड करने के बाद ही सही उत्तर पुस्तिका तक पहुंचा जा सकता है। यह कार्य गोपनीय है और बहुत कम कर्मचारी लगाए गए हैं। इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही याची की उत्तर पुस्तिकाएं कोर्ट में प्रस्तुत की जा सकेंगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए एक जुलाई की तिथि निर्धारित की है। उस दिन उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।



लोक सेवा आयोग की साख पर फिर उठा सवाल, PCS J के अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार तो कॉपी तलब

इससे पूर्व पीसीएस की परीक्षा में भी आ चुका है इस तरह का मामला


उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदले जाने और कॉपी के पन्ने फाड़ने का भी लगा आरोप

पीसीएस-जे 2022 की मुख्य परीक्षा में शामिल श्रवण पांडेय के 6 प्रश्न पत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश हाईकोर्ट ने आयोग को दिया है। याची अभ्यर्थी ने आरोप लगाया है कि उसकी अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदली हुई है तथा एक अन्य उत्तर पुस्तिका के पन्ने फाड़े गए हैं। जिसकी वजह से श्रवण मुख्य परीक्षा में असफल हुए हैं।


प्रयागराज । उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की साख पर एक बार फिर प्रश्नचिह्न लगा है। एक बार फिर बड़ी भर्ती परीक्षा में कॉपी बदलने का आरोप लगा है। इससे पहले विधान चुनाव 2017 के पहले ऐसा ही मामला सामने आया था। अब लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कॉपी बदलने का मामला सामने आया है।

अभ्यर्थी श्रवण पांडेय ने पीसीएस- जे 2022 की मुख्य परीक्षा में हैंडराइटिंग बदलने और उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने फाड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। इस पर हाईकोर्ट ने आयोग को अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे पहले पीसीएस 2015 की मुख्य परीक्षा में रायबरेली की सुहासिनी बाजपेई ने कॉपी बदलने का आरोप लगाया था। इसपर आयोग गलती स्वीकार करते हुए सुहासिनी का इंटरव्यू कराया था। हालांकि सुहासिनी इंटरव्यू में असफल हो गई थीं।

तब विधानसभा चुनाव 2017 के प्रचार के दौरान सुहासिनी का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी की रोहनियां की रैली में उठाया था। 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद आयोग ने यह स्वीकार किया था कि पीसीएस 2015 की मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली हुई है। इस अहम परीक्षा में सुहासिनी बाजपेई व रवींद्र तिवारी को मिले अंक एक-दूसरे को आवंटित हो गए थे।

आरटीआई के जरिए सुहासिनी ने उत्तर पुस्तिका दिखाने की मांग की थी। इसमें पहले उसे दूसरे की कॉपी दिखाई गई थी। आयोग सचिव के स्तर तक यह प्रकरण पहुंचने पर जो कॉपी उसकी बताई गई उसमें इतने अंक मिले थे कि वह मेंस उत्तीर्ण हो गई। पांच माह बाद उनका साक्षात्कार हुआ था लेकिन उसमें वह असफल हो गई। 


सुहासिनी के मामले में दो अधिकारी हुए थे निलंबित

लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2015 मुख्य परीक्षा की कॉपी बदलने के जिम्मेदार समीक्षा अधिकारी वीरेन्द्र कुमार सिंह और सहायक समीक्षा अधिकारी सुशील कुमार पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।



PCS J मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थी की कॉपी बदले जाने के आरोपों के बाद हाईकोर्ट ने कापियां कोर्ट में पेश करने का दिया आदेश

हाईकोर्ट ने मंगाईं पीसीएस-जे की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं

अभ्यर्थी का आरोप-अंग्रेजी की उत्तर पुस्तिका में बदली गई है हैंडराइटिंग

याची के अधिवक्ता ने कहा- एक अन्य उत्तर पुस्तिका के फाड़े गए पन्ने

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र. सेवा आयोग को पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा 2022 में शामिल अभ्यर्थी श्रवण पांडे के छह प्रश्न पत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। याची अभ्यर्थी का आरोप है कि उसकी अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदली है। साथ ही एक अन्य उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने फाड़े गए हैं। इन वजहों से मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने श्रवण पांडे की याचिका पर यह आदेश दिया है। याची अधिवक्ता विभु राय ने पक्ष रखा।


याची 2022 पीसीएस जे मुख्य परीक्षा में शामिल हुआ था। इसका परिणाम 30 अगस्त 2023 को जारी किया गया। मुख्य परीक्षा में कम अंक मिलने पर उसने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो पता चला कि अंग्रेजी प्रश्न पत्र में उसे मात्र 47 अंक मिले हैं। इस पर उसने आरटीआई के तहत छह प्रश्न पत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने की मांग की। देखने पर पता चला की अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका में उसकी हैंडराइटिंग नहीं है। साथ ही हिंदी की उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने फटे मिले।

कोर्ट ने उप्र. लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि याची की सभी छह उत्तर पुस्तिकाओं को अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाए। ताकि, अंग्रेजी की उत्तर पुस्तिका में याची की हैंडराइटिंग है या नहीं, इसका पता लगाया जा सके।

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