साल में दो बार हों JEE, NEET और CUET जैसी सभी प्रवेश परीक्षाएं, शिक्षकों को किया जाए प्रशिक्षित
कोचिंग से निर्भरता कम करने के लिए गठित कमेटी ने तैयार किया मसौदा, जल्द दिया जा सकता है अंतिम रूप
जून 2025 में तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अगुवाई में इसे लेकर गठित हुई थी नौ सदस्यीय कमेटी
नई दिल्लीः जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की कोचिंग से निर्भरता को कम करने के प्रयासों में जुटे शिक्षा मंत्रालय ने एक मसौदा तैयार किया है। इसमें इन परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार कराने सहित स्कूली शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से छात्रों को पढ़ाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित करने के सुझाव दिए गए हैं। जेईई मेन की परीक्षा को छोड़ दें तो अभी नीट व सीयूईटी साल में केवल एक बार ही आयोजित होती है।
छात्रों की कोचिंग पर से निर्भरता को कम करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में उस समय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कमेटी गठित की थी। हालांकि, अब विनीत जोशी इस पद नहीं हैं, लेकिन उन्होंने इस पद को छोड़ने से पहले ही इससे जुड़ा एक मसौदा तैयार कर विशेषज्ञों को अंतिम राय देने के लिए साझा कर दिया था।
मसौदे में जिन अन्य बिंदुओं पर फोकस किया गया है, उनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों की कठिनाई के स्तर की नए सिरे से समीक्षा करने का भी सुझाव दिया है। मौजूदा समय में छात्रों की यह शिकायत रहती है कि परीक्षा में कई सवाल या तो पाठ्यक्रम से बाहर के थे या फिर उनका स्तर बारहवीं कक्षा के बच्चों के स्तर से काफी ज्यादा था। ऐसे में कमेटी ने मसौदे में इसे नए सिरे से जांचने के लिए कहा है।
कमेटी ने अपने मसौदे में इसके साथ ही प्रश्न पत्रों को अकेले एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से तैयार करने की जगह उन्हें बाकी बोडौँ के पाठ्यक्रमों के अनुरूप तैयार करने का सुझाव दिया है। कमेटी का मानना था कि परीक्षाओं में बड़ी संख्या में केंद्रीय बोडों के अतिरिक्त राज्यों के परीक्षा बोर्डों के होते हैं। इससे ग्रामीण और राज्यों के परीक्षा बोडौँ के छात्रों को भी बराबरी का अवसर मिलेगा। गौरतलब है कि कोचिंग से छात्रों की निर्भरता को कम करने के लिए पिछले दिनों सरकार ने डमी स्कूलों के खिलाफ भी शिकंजा कसा था।
क्या होगा इसका लाभः यदि यह मसौदा अंतिम रूप लेता है तो छात्रों को परीक्षाओं के तनाव से मुक्ति मिलेगी। अभी साल में एक परीक्षा होने से छात्रों पर करो या मरो वाला दबाव रहता है, जबकि साल में दो बार परीक्षा होने से यह डर खत्म होगा। वहीं, शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने से स्कूली स्तर पर बेहतर पढ़ाई होगी होगी। अभिभावकों को कोचिंग की महंगी फीस नहीं देनी होगी। वहीं, देश के हर बोर्ड के छात्र के लिए परीक्षा का स्तर एक जैसा होगा।
परीक्षा में सुचारों पर नीलेकणि ने राधाकृष्णन समिति के अध्यक्ष रहे पूर्व इसरो प्रमुख से ली सलाह: परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाले पैनल ने ईसरो के पूर्व चेयरमैन के. राधाकृष्णन से सलाह-मशविरा किया। राधाकृष्णन ने 2024 में नीट पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई एक कमेटी की अध्यक्षता की थी। जुलाई में बनाया गया पैनल अलग-अलग स्टेक्होल्डर्स से सलाह-मशविरा कर रहा है और इसने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, विषय विशेषज्ञों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं से सुझाव भी मांगे हैं। जून 2024 में बनाई गई राधाकृष्णन कमेटी ने उसी साल अक्टूबर में अपनी सिफारिशें सौंपी थीं।
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