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Saturday, September 5, 2026

पैरामेडिकल डिग्रियों का देशभर में एक नाम और एक मानक, 33 नई व 21 पुनर्गठित डिग्रियों को मंजूरी, वर्ष 2026-27 सत्र से लागू होगी व्यवस्था

पैरामेडिकल डिग्रियों का देशभर में एक नाम और एक मानक,  33 नई व 21 पुनर्गठित डिग्रियों को मंजूरी,  वर्ष 2026-27 सत्र से लागू होगी व्यवस्था


लखनऊ : पैरामेडिकल और संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पाठ्यक्रमों में अब देशभर में एकरूपता होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) के ढांचे के अनुरूप 54 स्नातक व परास्नातक डिग्रियों को मानकीकृत करने का निर्णय लिया है। इनमें 33 नई और 21 पुनर्गठित डिग्रियां शामिल हैं। नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। इससे डिग्रियों के नाम, पाठ्यक्रम की अवधि व प्रवेश योग्यता पूरे देश में समान होगी।


31 अगस्त को जारी अधिसूचना के बाद एक ही विषय के अलग-अलग नाम और अवधि वाले पाठ्यक्रमों की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। अभी रेडियोलाजी के क्षेत्र में कहीं बैचलर आफ रेडिएशन इमेजिंग टेक्नोलाजी (बीआरआइटी), तो कहीं बीएससी रेडियोलाजी जैसे अलग-अलग नाम से पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे थे। नई व्यवस्था में फिजियोथेरेपी में स्नातक (बीपीटी), बैचलर आफ आक्यूपेशनल थेरेपी (बीओटी) और दृष्टि विज्ञान स्नातक (बीआप्टोम) जैसे प्रमुख पाठ्यक्रमों की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है।

स्नातकोत्तर स्तर पर भी विशेषज्ञता के विकल्प निर्धारित किए गए हैं। फिजियोथेरेपी में आठ, बीओटी में नौ तथा चिकित्सा रेडियोलाजी एवं प्रतिबिंबन में तीन विशेषज्ञताएं तय की गई हैं। एनसीएएचपी अध्यक्ष डा. यग्ना उन्मेश शुक्ला के अनुसार, यह निर्णय 'एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम' की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पाठ्यक्रमों का मानकीकरण रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मददगार हो सकता है।

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