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Wednesday, March 25, 2026

साधारण प्रकृति के लंबित आपराधिक मामले के आधार पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

साधारण प्रकृति के लंबित आपराधिक मामले के आधार पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण faislaa

साधारण आपराधिक मामला नियुक्ति से इन्कार का वैध आधार नहीं : हाई कोर्ट

कहा-सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, न कि दंडात्मक


लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मात्र साधारण प्रकृति के लंबित आपराधिक मामले के आधार पर किसी अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेष तौर पर तब जब उसने मामले की जानकारी स्वयं दी हो। यह निर्णय न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने राकेश कुमार वर्मा की सेवा संबंधी याचिका को मंजूर करते हुए पारित किया।


याची का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कनिष्ठ सहायक पद पर हुआ था और वह चिकित्सकीय रूप से भी उपयुक्त पाया गया था। इसके बावजूद लंबित एक आपराधिक मुकदमे के आधार पर उसे नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया था।

याची के विरुद्ध धारा 498-ए, 323, 504, 506 आइपीसी तथा दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज था, जो उसके बड़े भाई के वैवाहिक विवाद से जुड़ा हुआ था। अदालत ने पाया कि याची इस मामले में मुख्य आरोपी नहीं, बल्कि सह-आरोपी है और उसके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप भी नहीं है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवतार सिंह मामले में दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यदि अभ्यर्थी ने आपराधिक मामले की जानकारी स्वयं दी है और मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है, तो उसे केवल इसी आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

न्यायालय ने यह भी कहा कि पारिवारिक विवाद से जुड़े मामलों में सामान्य आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति के भविष्य को प्रभावित करना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, न कि दंडात्मक। इसी आधार पर न्यायालय ने नियुक्ति से इनकार संबंधी 6 जुलाई, 2020 के आदेश को निरस्त करते हुए, संबंधित विभाग को याची को तत्काल नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है।

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