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Saturday, June 21, 2025

लोक सेवा आयोग बताए, संदिग्ध लोक सेवकों पर कार्रवाई की क्यों नहीं दी मंजूरी? अभ्यर्थियों ने कहा, सीबीआई निदेशक के पत्र पर UPPSC स्पष्ट करे स्थिति

लोक सेवा आयोग बताए, संदिग्ध लोक सेवकों पर कार्रवाई की क्यों नहीं दी मंजूरी?  अभ्यर्थियों ने कहा, सीबीआई निदेशक के पत्र पर UPPSC स्पष्ट करे स्थिति

सीबीआई की ओर से जारी पत्रों को दबाकर रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

21 जून 2025
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) यह स्पष्ट करे कि सीबीआई की ओर कई पत्र जारी होने के बावजूद आयोग ने संदिग्ध लोक सेवकों के खिलाफ सीबीआई को कार्रवाई की मंजूरी क्यों नहीं दी। यह मांग उन अभ्यर्थियों की है, जिन्होंने भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सीबीआई के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए थे।

सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद की ओर से मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में यह स्पष्ट कहा गया है कि परीक्षाओं में धांधली के मामले में तीन संदिग्ध लोक सेवकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिलने का अगस्त 2021 से इंतजार किया जा रहा है। एपीएस परीक्षा-2010 के अभिलेखों के लिए आयोग को पांच बार पत्र लिखे गए।

पीसीएस परीक्षा-2015 से जुड़े जरूरी दस्तावेजों के लिए आयोग को आठ बार पत्र लिखे गए, लेकिन संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने की वजह से सीबीआई के लिए किसी निष्कर्ष तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। सीबीआई निदेशक के पत्र में किए गए इस खुलासे के बाद आयोग की परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ अपना बयान दर्ज कराने वाले अभ्यर्थी अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि सीबीआई की ओर से भेजे गए इन पत्रों को आखिर कहां दबा दिया गया, उच्चाधिकारियों तक ये पत्र पहुंचे या नहीं। अभ्यर्थी चाहते हैं कि इन सभी पहलुओं की जांच हो और आयोग भी स्थिति स्पष्ट करे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का कहना है कि बिना अफसरों की मिलीभगत के इतने गंभीर पत्रों को दबाकर रखना संभव नहीं है।

अवनीश की मांग है कि सीबीआई के जांच अधिकारी सीएम से मिलकर उन्हें इस पूरे मामले से अवगत कराएं। अभ्यर्थियों को अब मुख्यमंत्री से ही राहत मिलने की उम्मीद है।




लोक सेवा आयोग से सीबीआइ नाराज, जांच बंद करने की चेतावनीव, ठोस सुराग मिलने के बाद भी बंधे हैं हाथ, पीसीएस-2015, एपीएस-2010 समेत कई परीक्षाओं में भी मिले थे धांधली के सबूत

20 जून 2025
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को पीसीएस परीक्षा-2015 और एपीएस परीक्षा-2010 समेत कई दूसरी भर्तियों में भी धांधली के ठोस सुराग मिले हैं।

सीबीआई ने जहां पीसीएस-2015 के मामले में बाहरी अज्ञात लोगों व आयोग के अज्ञात अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, वहीं अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 के मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके अलावा सीबीआई ने गड़बड़ियां मिलने पर आधा दर्जन अन्य भर्तियों के मामले में प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज की थी।


जिन भर्तियों के मामले में पीई दर्ज की गई थीं, उनमें समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2013, सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2013, उत्तर प्रदेश प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा-2013 और मेडिकल ऑफिसर परीक्षा-2014 शामिल हैं।

पीसीएस-2015 और एपीएस-2010 के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद चार साल से जांच प्रक्रिया सिर्फ इसलिए ठप है, क्योंकि इन दोनों मामलों में सीबीआई को आयोग से पर्याप्त दस्तावेज और संदिग्ध लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल सकी है।

इन दोनों बड़ी भर्तियों की जांच ठप होने के कारण सीबीआई उन आधा दर्जन भर्ती परीक्षाओं की जांच तेजी से आगे नहीं बढ़ा पा रही है जिनमें प्रारंभिक जांच के दौरान गड़बड़ी के सुराग मिले हैं।


आयोग पर जल्द दस्तावेज उपलब्ध कराने का दबाव

भर्ती परीक्षाओं की जांच के मामले में सीधे सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद के हस्तक्षेप के बाद आयोग पर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेजों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का दबाव है। लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के मामले में भी फैसला लेने का दबाव बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई को दस्तावेज प्राप्त कराने के लिए फोटो कॉपी, नंबरिंग आदि प्रक्रिया तेज कर दी गई है।


पांच साल की जांच में एक भी गिरफ्तारी नहीं 

सीबीआई की ओर से अप्रैल 2012 से लेकर मार्च 2017 तक की तकरीबन 600 भर्ती प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। अब तक दो मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, लेकिन किसी पर न तो सीधी कार्रवाई हुई न ही गिरफ्तारी।

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