पहली परीक्षा में ही फेल हो गया नवगठित आयोग, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के दूसरे दिन से ही शुचिता पर उठने लगे थे सवाल
प्रयागराज । 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अपनी पहली और एकमात्र परीक्षा में ही फेल हो गया। इसके लिए आवेदन तीन साल पहले 31 अगस्त 2022 तक तब लिए गए थे जब यह भर्ती उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग से होती थी। नवगठित आयोग ने 16 और 17 अप्रैल 2025 को 33 विषयों की लिखित परीक्षा कराई थी जिसमें 82 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। प्रदेश के 331 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा का परिणाम आयोग ने साढ़े चार महीने बाद चार सिंतबर को घोषित किया था। दो चरणों में 25 सितंबर से आठ अक्टूबर तक और 28 अक्टूबर से चार नवंबर तक साक्षात्कार का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया था। हालांकि पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय को सितंबर में ही इस्तीफा देना पड़ गया जिससे पूरी प्रक्रिया ठप हो गई।
प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित लिखित परीक्षा भले ही साढ़े आठ महीने बाद निरस्त हुई है लेकिन इसकी शुचिता पर पेपर के दूसरे दिन से ही सवाल उठने लगे थे। सटीक सूचना के आधार पर एसटीएफ की टीम ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के संविदा कर्मचारी महबूब अली को 18 अप्रैल को ही आयोग परिसर से उठा लिया था। उस समय एसटीफ ने खुलासा किया था कि असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से एक करोड़ की रकम हड़पी गई थी।
एसटीएफ ने महबूब अली के अलावा गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के राजनीतिक शास्त्र के सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल और अनुदेशक विनय कुमार पाल को जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में गहन जांच में साफ हो गया कि पेपरलीक का मास्टर माइंड महबूब अली ही था। सरकार को भी कहीं न कहीं परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका हो गई थी। यही कारण है कि लिखित परीक्षा के दो महीने के अंदर ही 12 जून को असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद कॉपी जंचवाने से लेकर कटऑफ जारी करने और चयन तक की प्रक्रिया पूरी करने के लिए शासन ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी।
पहली बार परिणाम के लिए गठित हुई थी वाह्य कमेटीः असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के बाद चयन प्रक्रिया संपन्न करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित होने के बाद से ही आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए थे। ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी आयोग की लिखित परीक्षा कराने के बाद कॉपी जंचवाने से लेकर चयन प्रक्रिया पूरी करवाने तक के लिए बाहरी समिति गठित की गई हो। समिति में एडीएम सिटी प्रयागराज सत्यम मिश्रा, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक गीतांजलि सिंह, एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह और उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज में सहायक निदेशक अजीत कुमार सिंह को शामिल किया गया था।
शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा एडेड डिग्री कालेजों में होनी थी भर्ती
एसटीएफ की जांच में प्रश्नपत्र लीक और अवैध वसूली का हुआ पर्दाफाश
आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति के गोपनीय सहायक की संलिप्तता उजागर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा एडेड डिग्री कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पता चला है। जांच में नकल माफिया की सक्रिय भूमिका, फर्जी प्रश्नपत्र और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया गया है कि परीक्षा का आयोजन दोबारा जल्द किया जाए और यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय हो। जांच में आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति पांडेय के गोपनीय सहायक महबूब अली की संलिप्तता उजागर हुई। इसी कारण कीर्ति पांडेय से त्यागपत्र लिया गया था ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत एडेड डिग्री कालेजों में 910 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इस भर्ती के लिए करीब 82 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा के बाद ही बड़े पैमाने पर धांधली, नकल और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने लगी थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसटीएफ से गोपनीय जांच कराई गई।
जांच के दौरान पिछले वर्ष 20 अप्रैल को एसटीएफ ने फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया था। इन पर परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के आरोप हैं। इस संबंध में लखनऊ के थाना विभूतिखंड में मुकदमा दर्ज किया गया। मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने माडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकाल लिए थे और उन्हें पैसे लेकर कई अभ्यर्थियों को दिया। एसटीएफ की गहन विवेचना और डाटा एनालिसिस से इसकी पुष्टि हुई। जांच के क्रम में गिरफ्तार अभियुक्तों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन नंबरों का डाटा विश्लेषण किया गया। मुखबिर तंत्र से मिली सूचनाओं के आधार पर अन्य संदिग्ध लोगों के नाम भी सामने आए।
0 comments:
Post a Comment