Searching...
Wednesday, January 14, 2026

नीट पीजी : आरक्षित वर्ग के लिए कटऑफ शून्य पसेंटाइल, माइनस 40 अंक वाले भी पा सकेंगे दाखिला, मेडिकल स्नातकोत्तर की 18000 से ज्यादा सीटें हैं खाली

नीट पीजी : आरक्षित वर्ग के लिए कटऑफ शून्य पसेंटाइल, माइनस 40 अंक वाले भी पा सकेंगे दाखिला, मेडिकल स्नातकोत्तर की 18000 से ज्यादा सीटें हैं खाली


नई दिल्ली। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर की 18,000 से अधिक सीटें खाली रहने के कारण राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड (एनबीईएमएस) ने नीट पीजी-2025 प्रवेश के लिए पसेंटाइल कटऑफ में बदलाव किया है। आरक्षित वर्ग के लिए कटऑफ पर्सेटाइल 40 से घटाकर शून्य, जबकि सामान्य वर्ग व ईडब्ल्यूएस के लिए 50 से घटाकर 7 पसेंटाइल किया गया है। सामान्य वर्ग के दिव्यांगों के लिए यह 45 से घटाकर 5 फीसदी है।

बोर्ड ने यह निर्णय नीट पीजी दाखिले के लिए दूसरे दौर की काउंसलिंग पूरी होने के बाद किया है। बदलाव के बाद खास यह है कि आरक्षित श्रेणी में पहले 235 अंक वाले पात्र थे, अब माइनस 40 अंक पाने वाले भी दाखिला पा सकेंगे। यानी शून्य से 40 अंक नीचे वाले उम्मीदवार भी स्नातकोत्तर दाखिले के पात्र होंगे।

सामान्य वर्ग के जिन उम्मीदवारों को 103 अंक मिले होंगे, वे दाखिला पाने के पात्र होंगे। पहले यह 276 था। इसी तरह, सामान्य दिव्यांगों के लिए पहले 255 अंक जरूरी थे। अब 90 अंक लाने वाले भी दाखिले के पात्र होंगे।


उठे सवाल : डॉक्टर बोले यह मानकों का पतन

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस के मुख्य संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने कहा, कमाल की बात है कि परीक्षा में कोई प्रश्न हल नहीं कर पाने के बाद शून्य पाने वाले और कई प्रश्न गलत कर माइनस अंक पाने वाले प्रत्याशी देश में विशेषज्ञ चिकित्सक बनने के पात्र घोषित कर दिए गए हैं।

कृष्णन ने कहा, ये सभी सर्जरी में भाग लेने के योग्य होंगे और देश में डॉक्टरी की प्रैक्टिस कर पाएंगे। यह बहुत दुखद है। कटऑफ को शून्य तक कम कर दिया जाए, तो राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा का क्या मकसद है। यह मानकों का पतन है।


मेडिकल की पीजी सीटों पर दाखिले के लिए जीरो कटऑफ के विरोध में डॉक्टर

लखनऊ। मेडिकल की पीजी सीटों पर दाखिले के लिए कटऑफ जीरो परसेंटाइल किए जाने के खिलाफ उत्तर प्रदेश के डॉक्टर संगठन में नाराजगी है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) ने इसके खिलाफ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। अब संगठन की यूपी इकाई भी इसके खिलाफ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है। दो चरणों की काउंसलिंग के बाद यूपी में तकरीबन 1200 सीटें खाली हैं।

उत्तर प्रदेश में मेडिकल के पीजी कोर्स की 1200 खाली सीटों में से सभी निजी कॉलेजों में नॉन क्लीनिकल ब्रांच की हैं। दो चरणों की काउंसलिंग के बावजूद ये सीटें खाली रह गई हैं। कॉलेजों ने कई बार खाली सीटें भरने के लिए कटऑफ कम किए जाने की मांग की थी। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) ने जीरो परसेंटाइल तक को दाखिला दिए जानेको मंजूरी दे दी है।

फाइमा के राष्ट्रीय सह अध्यक्ष और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राज्य समन्वयक डॉ. दिव्यांश सिंह ने कहा कि एनबीई के इस फैसले से मेडिकल की गुणवत्ता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इसका असर यह होगा कि नीट में -40 अंक पाने वाले अभ्यर्थी भी दाखिले के लिए योग्य हो जाएंगे। क्या यह उचित होगा? एनबीई का फैसला यूपी समेत पूरे देश में लागू होता है। राष्ट्रीय स्तर से केंद्रीय मंत्री को विरोध में पत्र लिखा गया है। अब यूपी में भी उप मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को रुकवाने की मांग की जाएगी।

आईएमए ने की थी कटऑफ कम किए जाने की मांग

डॉ. दिव्यांश ने बताया कि आईएमए ने ही सीटें खाली रह जाने पर कटऑफ कम किए जाने की मांग की थी। इसकी मंशा किसी भी सूरत में शून्य परसेंटाइल किए जाने की नहीं थी। अगर यह फैसला अभी लागू हुआ तो इससे डॉक्टरों की




0 comments:

Post a Comment