Searching...
Wednesday, November 19, 2025

परीक्षाएं स्थगित करने का रिकॉर्ड बना रहा शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रतियोगियों में निराशा संग नाराजगी

परीक्षाएं स्थगित करने का रिकॉर्ड बना रहा शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रतियोगियों में निराशा संग नाराजगी

टीजीटी के 3539 पदों के लिए आए हैं 868531 आवेदन

पीजीटी के 624 पदों के लिए आए हैं 464605 आवेदन


प्रयागराज। शिक्षा सेवा चयन आयोग परीक्षाएं स्थगित करने का रिकॉर्ड बनाता दिख रहा है। खास यह कि टीजीटी भर्ती परीक्षा मंगलवार को चौथी बार स्थगित की गई। इससे पहले प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती परीक्षा भी चार बार स्थगित हो चुकी है। इसके -- अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा .. का साक्षात्कार स्थगित हो चुका है।

तीनों भर्तियों की तारीख एक-एक - बार प्रो. कीर्ति पांडेय के इस्तीफे की वजह से स्थगित करनी पड़ी है, लेकिन इससे पूर्व में तैयारी नहीं होने से परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को आवेदन उच्चतर सेवा चयन आयोग ने लिए थे। वहीं, टीजीटी एवं पीजीटी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से मांगे गए थे। बाद में इन्हें भंग करके शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया और अब नए आयोग पर इन भर्तियों की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी है।

इन तारीखों को प्रस्तावित थी पीजीटी भर्ती परीक्षा
- 11 व 12 अप्रैल 2025
- 20 व 21 जून 2025
- 18 व 19 जून 2025
- 15 व 16 अक्तूबर 2025


प्रतियोगियों में निराशा संग नाराजगी
लगातार भर्ती परीक्षाएं स्थगित होने से प्रतियोगियों में निराशा के साथ नाराजगी है। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष विक्की खान का कहना है कि यह प्रतियोगियों का मानसिक उत्पीड़न है, उनके साथ अन्याय हो रहा है। वर्षों से नई भर्ती नहीं होने से बड़ी संख्या में प्रतियोगी ओवरएज भी होते जा रहे हैं। विक्की खान का कहना है कि बार-बार परीक्षा स्थगित होने से आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठता है। प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल के शीतला प्रसाद ओझा ने भी बार-बार परीक्षा स्थगित किए जाने से आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। शीतला प्रसाद ने परीक्षा नियंत्रक को हटाए जाने की भी मांग की।




TGT शिक्षक भर्ती परीक्षा नौ महीने में पांचवीं बार स्थगित 

अप्रैल से मई फिर जुलाई के बाद 18-19 दिसंबर को प्रस्तावित की गई थी परीक्षा

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती परीक्षा एक बार फिर स्थगित कर दी है। इस भर्ती के लिए आवेदन जनवरी 2022 में लिया गया था, तीन साल से लाखों अभ्यर्थी परीक्षा होने का इंतजार कर रहे हैं पर स्थिति यह है कि इस साल अप्रैल से लेकर अब तक पांचवीं बार यह परीक्षा टाली जा चुकी है।

उपसचिव की ओर से जारी सूचना के अनुसार मंगलवार को हुई आयोग की बैठक में 18-19 दिसंबर को प्रस्तावित परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया गया। आगामी तिथि बाद में घोषित करने की बात कही गई है। 

उप सचिव की ओर से जारी विज्ञप्ति में परीक्षा टालने की वजह स्पष्ट नहीं है पर सूत्रों के अनुसार, आयोग में नए अध्यक्ष की नियुक्ति में हो रही देरी से यह निर्णय लिया गया है। अध्यक्ष ने पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया था।

 यह भर्ती 3539 पदों के लिए की जानी है, जिसके लिए 8.68 लाख से अधिक ने आवेदन किया है। आयोग ने सबसे पहले टीजीटी भर्ती परीक्षा की तिथि 4-5 अप्रैल को घोषित की थी, जो टलगई। इसके बाद 14-15 मईकी तिथि घोषित हुई, लेकिन परीक्षा नहीं हो पाई। 

आयोग ने 21-22 जुलाई और उसके बाद 30-31 जुलाई की तिथियां घोषित कीं। परीक्षा नहीं हो पाई। लगभग दो माह पहले 18-19 दिसंबर को परीक्षा कराने की घोषणा की गई थी लेकिन मंगलवार को फिर परीक्षा स्थगित कर दी गई।



परीक्षा टलने का बन रहा रिकार्ड, फिर स्थगित हो सकती है TGT परीक्षा, शिक्षा सेवा चयन आयोग की 18-19 दिसंबर को प्रस्तावित टीजीटी परीक्षा मुश्किल में

दिसंबर में नए अध्यक्ष मिलने पर परीक्षा कराने की तैयारी के लिए नहीं बचेगा समय

प्रयागराजः चार बार तिथि घोषित कर वर्ष 2022 की प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती परीक्षा न करा सके उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सामने अब 18-19 दिसंबर को प्रस्तावित टीजीटी परीक्षा पांचवीं बार टलने की स्थिति बन गई है। उम्मीद की जा रही थी कि नवंबर मध्य तक नए अध्यक्ष का चयन हो जाने पर प्रस्तावित तिथि पर टीजीटी परीक्षा कराए जाने पर निर्णय लिया जा सकता है, लेकिन अब शिक्षा सेवा चयन आयोग संशोधन अध्यादेश 2025 मंजूर होने से नवंबर में आयोग को नया अध्यक्ष मिलने की उम्मीद नहीं है। दिसंबर में अध्यक्ष का चयन होने पर दिसंबर मध्य में प्रस्तावित तिथि पर कम समय में परीक्षा कराने की तैयारी मुश्किल होगी। ऐसे में माना जा रहा है कि अब टीजीटी परीक्षा स्थगित की जा सकती है।

3539 पदों की टीजीटी के लिए जनवरी 2022 में विज्ञापन जारी किया गया था। इसके लिए 8.68 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए। शिक्षा आयोग ने टीजीटी परीक्षा आयोजन की तिथि चार, पांच अप्रैल 2025 प्रस्तावित की थी। नहीं होने पर नई तिथि 14,15 मई प्रस्तावित की गई, लेकिन परीक्षा हो नहीं सकी। इसके बाद 21,22 जुलाई की तिथि प्रस्तावित की गई, लेकिन परीक्षा फिर नहीं हुई। इसके बाद आयोग पहुंचे अभ्यर्थियों को बताया गया कि 30, 31 जुलाई को होगी, लेकिन फिर वही हुआ, परीक्षा नहीं हुई। इसके बात तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पाण्डेय ने एक अगस्त को बैठक कर परीक्षा आयोजन की तिथि 18, 19 दिसंबर तक निर्धारित की। 

इस बीच 22 सितंबर को उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया, जो 26 सितंबर को स्वीकृत कर लिया गया। इसके बाद नए अध्यक्ष के लिए 26 सितंबर से 21 अक्टूबर तक आवेदन लिए गए। उम्मीद थी कि नवंबर मध्य तक नए अध्यक्ष का चयन हो जाएगा और वह प्रस्तावित तिथि 18,19 दिसंबर को परीक्षा आयोजन पर निर्णय लेंगे, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं बनी। अब शासन अर्हता में बदलाव कर नए सिरे से विज्ञापन जारी कर आवेदन लेने की तैयारी में है। ऐसे में दिसंबर के पहले आयोग को नए अध्यक्ष के मिलने की उम्मीद नहीं है। दिसंबर में अध्यक्ष का चयन होने के बाद प्रस्तावित तिथि पर परीक्षा तैयारी उनके लिए मुश्किल होगी। इस कारण यह परीक्षा एक बार फिर स्थगित हो सकती है। इसके पहले कार्यवाहक अध्यक्ष के निर्णय पर 15, 16 अक्टूबर की परीक्षा स्थगित की जा चुकी है।



अब समय से नहीं हो पाएगी स्नातक शिक्षक भर्ती (TGT) व शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET), नए सिरे से शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद के लिये लिया जायेगा आवेदन 

नियमों में संशोधन के कारण शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी कर लिया जाएगा आवेदन


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी में जुटे प्रतियोगियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। स्नातक शिक्षक भर्ती (टीजीटी) एवं शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का कार्यक्रम भी स्थगित होना तय माना जा रहा है। 22 सितंबर को प्रो. कीर्ति पांडेय ने आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए 21 अक्तूबर तक आवेदन मांगे गए थे लेकिन अब अध्यक्ष पद की पात्रता में परिवर्तन कर दिया गया है।

पूर्व के विज्ञापन में प्रमुख सचिव स्तर के प्रशासनिक अफसर ही अध्यक्ष पद के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन नए प्रावधान के तहत प्रमुख सचिव के समकक्ष अधिकारी भी अध्यक्ष बनने के लिए पात्र होंगे। शासन की ओर से किए संशोधन के बाद अध्यक्ष पद के लिए अब नए सिरे से आवेदन लेने होंगे। इसके लिए नए सिरे से विज्ञापन भी जारी किया जाएगा। चूंकि आवेदन के लिए न्यूनतम 21 दिन का मौका देना होगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

आयोग के अफसरों के अनुसार इस प्रक्रिया के पूरी होने में न्यूनतम एक महीने लग जाएंगे। ऐसे में प्रक्रिया बहुत जल्द पूरी हुई तब भी 15 दिसंबर के बाद ही नए अध्यक्ष के मिलने की संभावना है। वहीं, स्नातक शिक्षक भर्ती परीक्षा 18 और 19 दिसंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में नए अध्यक्ष के अभाव में यह परीक्षा भी स्थगित होनी तय है। इसके अलावा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) भी 29 एवं 30 जनवरी को प्रस्तावित है।

खास बात यह कि टीईटी के लिए आयोग की ओर से विज्ञापन जारी करके पहले आवेदन लिए जाएंगे। विज्ञापन भी नए अध्यक्ष के आने के बाद यानी बहुत जल्दी हुआ तो दिसंबर के आखिरी सप्ताह में जारी हो पाएगा। ऐसे में टीईटी का भी टलना तय हो गया है।


अधियाचन के लिए भी पोर्टल का करना होगा इंतजार

शिक्षा सेवा चयन आयोग में अधियाचन के लिए भी अभी पोर्टल का इंतजार करना पड़ेगा। आयोग की ओर से अधियाचन पोर्टल बनाने का कार्य चल रहा है। संबंधित विभागों से पोर्टल के माध्यम से ही रिक्त पदों के अधियाचन लिए जाएंगे। पूर्व में 10 नवंबर तक ही पोर्टल तैयार होने की बात कही गई थी लेकिन अभी इसमें समय लग सकता है। आयोग सूत्र के अनुसार एनआईसी की मदद से पोर्टल तैयार किया जा रहा है जिसमें अभी 15 दिन से अधिक का समय लग सकता है। इसके बाद आयोग के साथ संबंधित विभागों की ओर से करीब एक महीने तक ट्रायल किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1250 एवं टीजीटी व पीजीटी के 22 हजार से अधिक पदों के अधिकृत अधियाचन के लिए भी अभी इंतजार करना होगा।

संशोधन के साथ अध्यक्ष पद के लिए एक आईपीएस अधिकारी का नाम भी चर्चा में : पात्रता संबंधी संशोधन के फैसले के बाद अध्यक्ष पद के लिए एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी के नाम की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। प्रो. कीर्ति पांडेय के इस्तीफे के बाद भी उनके नाम की चर्चा थी लेकिन विज्ञापन में कुलपति एवं प्रोफेसर के अलावा प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस से ही आवेदन मांगे गए थे। ऐसे में वह आवेदन नहीं कर पाए थे। वहीं, आयोग के अफसरों के अनुसार पात्रता में संशोधन के बाद प्रमुख स्तर के कार्यरत या रिटायर्ड आईपीएस अफसर भी आवेदन कर सकेंगे। ऐसे में रिटायर्ड आईपीएस अफसर के नाम की चर्चा फिर शुरू हो गई है।



प्रमुख सचिव के समकक्ष भी बन सकेंगे शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष, अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी

संशोधन के बाद बढ़ गया है अध्यक्ष के चयन का दायरा आयोग को अब जल्द मिल सकता है नया अध्यक्ष


लखनऊ: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद पर अब केवल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार में प्रमुख सचिव या उनके समकक्ष पद पर कार्य कर चुके अधिकारी भी नियुक्त हो सकेंगे। आयोग के अध्यक्ष पद के लिए वांछित योग्यता में यह बदलाव करने के लिए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद जल्द ही आयोग को नया अध्यक्ष मिल सकता है।


अभी तक उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम में यह व्यवस्था थी कि आयोग का अध्यक्ष वही व्यक्ति बन सकता है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य रहा हो और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव या उसके समकक्ष पद पर कार्य कर चुका हो। संशोधन के जरिये अधिनियम में भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य हो के स्थान पर राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद पर हो या हो रहा हो प्रतिस्थापित किया गया है। इस संशोधन के बाद अध्यक्ष के चयन का दायरा बढ़ गया है।


उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि आयोग के कामकाज में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करने के लिए अनुभवी और सक्षम व्यक्ति की आवश्यकता है। यही कारण है कि पात्रता की शर्तों को थोड़ा लचीला किया गया है, ताकि अधिक योग्य और अनुभवी लोगों को अध्यक्ष पद के लिए अवसर मिल सके।


उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन वर्ष 2023 में किया गया था। आयोग पर उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभागों के लिए टीईटी, टीजीटी, पीजीटी, असिस्टेंट प्रोफेसर आदि पदों की भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने की जिम्मेदारी है।
चयन आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय के इस्तीफे के बाद से आयोग के अध्यक्ष पद के लिए 21 अक्टूबर तक आवेदन मांगे गए थे। बताया जा रहा है कि 67 लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है। इसमें प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों ने भी आवेदन किया है। अभी तक प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी के अलावा वर्तमान या पूर्व कुलपति, तीन वर्ष प्रशासनिक पद पर कार्य करने वाले न्यूनतम 10 वर्ष तक प्रोफेसर रहे व्यक्ति भी इसके लिए आवेदन कर सकते थे।

0 comments:

Post a Comment