बढ़ सकती है निजी ITI की फीस, महानिदेशालय के प्रस्ताव पर सरकार लेगी अंतिम निर्णय
नई दरें लागू होने से तीन लाख विद्यार्थियों पर असर, ग्रामीण-शहरी में समान शुल्क
लखनऊ: कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के प्रशिक्षण महानिदेशालय ने निजी एवं स्ववित्तपोषित आइटीआइ संस्थानों की फीस को नए सिरे से निर्धारित कर दिया है। अब इस प्रस्ताव को लागू करने का अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है। यह बढ़ोतरी लागू होती है, तो प्रदेश भर के करीब तीन लाख विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा महंगी हो सकती है। संस्थानों का तर्क है कि बढ़ती लागत और संसाधनों के बेहतर संचालन के लिए फीस वृद्धि आवश्यक है। वहीं, मनमानी फीस पर रोक लगने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत ट्रेड को दो श्रेणियों तकनीकी और गैर तकनीकी में बांटा गया है। तकनीकी ट्रेड के लिए वार्षिक फीस 26,000 रुपये और गैर तकनीकी ट्रेड के लिए 21,200 रुपये तय की गई है। खास बात यह है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए एक समान फीस रखी गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में भी आइटीआइ संस्थानों को बढ़ावा देना और अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना है। हर साल फीस में पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रविधान किया गया है, ताकि संस्थानों की बढ़ती लागत और संसाधनों की जरूरतों को संतुलित किया जा सके। फीस संरचना की समीक्षा हर पांच वर्ष में की जाएगी। हालांकि, नई फीस दरों से विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
अभी ये है फीस
वर्तमान में गैर तकनीकी कोर्स की फीस 15,000 रुपये और तकनीकी कोर्स की 18,000 रुपये है। नई दरें लागू होने से गैर तकनीकी में 5,200 और तकनीकी में 8,000 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। अधिकारियों का दावा है कि नई दरें लागू होने से मनमानी फीस पर लगाम लगेगी।
सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को किसी तरह की परेशानी न हो। प्राइवेट आइटीआइ वेलफेयर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी ने फीस निर्धारण का स्वागत किया है। उनका कहना कि इससे संस्थानों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा। प्रदेश सरकार को नई फीस दरें लागू करनी चाहिए।
वहीं, अपर निदेशक प्रशिक्षण राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि व महानिदेशालय की ओर से निर्धारित फीस को लागू करने का निर्णय सरकार को लेना है। इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते।
0 comments:
Post a Comment