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Sunday, August 4, 2019

UPPSC : डेढ़ साल में किसी तक नहीं पहुंची जांच की आंच, एक बेनामी एफआईआर के अलावा कुछ नहीं कर सकी सीबीआई

4:50:00 PM
UPPSC : डेढ़ साल में किसी तक नहीं पहुंची जांच की आंच, एक बेनामी एफआईआर के अलावा कुछ नहीं कर सकी सीबीआई।


अभ्यर्थियों की हुंकार दोषियों पर करें कार्रवाई


  • August 05, 2019
राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 2018 के अभ्यर्थियों ने एक बार फिर एसटीएफ जांच में तेजी लाने की मांग उठाई है। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन में रविवार को आमसभा बुलाकर अभ्यर्थियों ने दो टूक कहा कि पेपर लीक मामले के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एलटी समर्थक मोर्चा के बैनर पर हुई आमसभा में सबने एक स्वर में पेपर लीक प्रकरण की निंदा की।
आमसभा में यह मामला भी उठा कि एसटीएफ 29 जुलाई 2018 से पेपर लीक प्रकरण की जांच कर रही है। इसमें 50 अभ्यर्थियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई लेकिन, अभी तक मात्र छह का ही बयान दर्ज कराया जा सका। मोर्चा प्रतिनिधि अनिल उपाध्याय का कहना है कि आरोपी अभ्यर्थियों का नाम, पता, फोन नंबर, कॉल डिटेल, रोल नंबर का पता नहीं चल पाया है। यूपीपीएससी ने सबके दस्तावेज सौंप दिए उसके बाद भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। मोर्चा संयोजक विक्की खान व अध्यक्ष शेर सिंह ने भी अपने विचार रखे। अपर्णा पांडेय व अनुज्ञा द्विवेदी ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ व आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार भ्रष्टाचार खत्म करके प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने की बात करते हैं। ऐसे में जांच निष्पक्ष होगी हमें उसका भरोसा है।




विवादों में परीक्षा, अभ्यर्थियों के सब्र का इम्तिहान



  • August 05, 2019
राज्य ब्यूरो, प्रयागराज: प्रतियोगी परीक्षा के विवाद अब अभ्यर्थियों को अचरज में नहीं डालते। भर्तियों के विवाद कुछ ¨बदुओं को लेकर हुए हैं, लेकिन एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2018 ने अब तक के सारे विवादों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विज्ञापन होने से लेकर अब तक हर कदम पर गंभीर सवाल उठे। भर्ती परीक्षा का एक साल हो चुका है, चयन अधूरा है। अभ्यर्थी लिखित परीक्षा परिणाम के साथ सब्र का भी इम्तिहान दे रहे हैं।
शासन ने इस भर्ती में बेहतर चयन कराने के लिए कोई कसर नहीं रखी। पहली बार लिखित परीक्षा से एलटी ग्रेड शिक्षक चयन का प्रावधान किया। परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो इसलिए जिम्मा उप्र लोकसेवा आयोग को सौंपा। आयोग भी इतने पदों की परीक्षा पहली मर्तबा करा रहा था। विज्ञापन के साथ ही जब विवाद शुरू हुए तो लगातार बढ़ते रहे। अब पूरी परीक्षा गंभीर सवालों के घेरे में है। चयन पूरा होने के बाद भी विवाद थमने के आसार नहीं है।











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